21 वर्षीय राम की कहानी: ब्रह्मचर्य, आत्मविश्वास और जीवन परिवर्तन की अद्भुत यात्रा

November 24, 2025 • By Shubham Vishwakarma

21 वर्षीय राम की कहानी: ब्रह्मचर्य, आत्मविश्वास और जीवन परिवर्तन की अद्भुत यात्रा (Featured Image)

यह एक काल्पनिक कहानी है; इस कहानी से आपको ब्रह्मचर्य की सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी। हमारा उद्देश्य है कि हर इंसान जीवन में एक बार ब्रह्मचर्य का पालन ज़रूर करे, कम से कम एक वर्ष तक।


कहानी में राम नाम का एक लड़का है, जिसकी उम्र 21 वर्ष है। राम अपनी क्लास का सबसे सीधा लड़का है। उसका पढ़ाई में शुरू से मन नहीं लगता। अभी वह कॉलेज में BA सेकंड ईयर में है। जैसा वह है, वैसा ही उसने कॉलेज चुना—मतलब वह सिर्फ पेपर देने के लिए ही कॉलेज जाता है।


राम अभी कुछ नहीं करता, बस दिन-भर मोबाइल चलाना और दोस्तों के आगे-पीछे घूमना—बस यही उसका काम है। दोस्तों के साथ रहकर उसे कुछ महीनों से सिगरेट की लत लग गई है। अभी उसे यह सब मज़ा लग रहा है।


राम के परिवार में पापा, मम्मी और उसकी बड़ी बहन हैं। मम्मी घर का काम देखती हैं, पापा फर्नीचर का काम करते हैं, और उसकी बड़ी बहन कॉल सेंटर में नौकरी करती है। राम अपने घर के सामने वाली लड़की (दिया) को बहुत पसंद करता है, पर आज तक उससे बात करने की हिम्मत नहीं हुई। राम में आत्मविश्वास बहुत कम था। जब भी उस लड़की से बात करने की बारी आती, या वह लड़की उससे बात करती, तो राम दो–तीन शब्द बोलकर चुप हो जाता। वह अपने दोस्तों (मोहन, अरुण , आकाश) के बीच भी बहुत कम बात करता है। हम राम को शर्मीला भी कह सकते हैं। लेकिन वह अपनी मम्मी और बहन (नेहा) के सामने बहुत बोलता है।


एक दिन राम के तीनों दोस्त (मोहन, अरुण , आकाश) उसे बुलाने उसके घर पर आए।


अरुण: "राम, चलो क्रिकेट खेलने चलते हैं।"


मम्मी: "अरे, राम तो अभी बाथरूम में है। तुम तीनों अंदर आओ बैठो।"


मम्मी: "चाय पियोगे?"


(मोहन, अरुण, आकाश): "नहीं आंटी, अभी नहीं।"


तीनों पहली बार राम के घर आए थे। राम कभी अपने दोस्तों को घर पर नहीं लाता था, आज पता नहीं कैसे आ गए। 


मम्मी: "तो बताओ, तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है? आगे क्या करोगे?"


आकाश: "आंटी, हम तो सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। हमने राम को भी कहा कि वह हमारे साथ कर ले, पर वह करता ही नहीं है।"


मम्मी: उसे शुरू से पढ़ाई में मन नहीं लगता। BA पूरा हो जाए, फिर वह भी अपने पापा के साथ फर्नीचर का काम करेगा।


मोहन: "आंटी, आप तो राम की शादी करवा दो।"


अरुण: "मोहन, शादी कैसे करवा दें? वह लड़कियों से बात भी तो नहीं कर पाता है।"


राम बाथरूम से सारी बातें सुन रहा था। उसे तीनों पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि बिना बताए उसके घर कैसे आ गए।


राम (जल्दी तैयार होकर बोला): "चलें?"


आकाश: "हाँ, चलो-चलो, वैसे भी बहुत लेट हो गए हैं।"


कुछ दूर चलने के बाद राम को दिया दिखाई दे गई।


राम (मन में): अरे नहीं, इसे भी अभी सामने आना था।


दिया, राम और उसके दोस्तों से आगे चल रही थी। वह राम के दोस्तों की सारी बातें आराम से सुन सकती थी। राम कुछ नहीं बोल रहा था।


मोहन: राम, बाथरूम में क्या कर रहा था?


राम: कुछ भी तो नहीं।


अरुण: राम, शर्मा मत, बता दे।


राम: भाई, मैं सच में कुछ नहीं कर रहा था।


मोहन: तो फिर बाथरूम में क्यों था? नहा रहा था क्या?


अरुण: नहीं, नहीं, राम सुबह नहा लिया था।


दिया: राम, कहाँ जा रहे हो?


राम: क्रिकेट खेलने।


मोहन (दिया से): आपका नाम?


दिया: दिया।


मोहन: शायद आप राम को जानती हों।


दिया: हाँ, वो मेरे घर के सामने रहता है।


फिर वो तीनों दिया के सामने राम के मज़े लेने लगे। राम को यह सब बहुत बुरा लग रहा था — पहले मम्मी के सामने, और अब दिया के सामने।


क्रिकेट खेलने के बाद राम अकेले घर जा रहा था। घर जाते हुए उसे फिर से दिया दिखी — वह कोचिंग से घर जा रही थी। दिया को देखते ही राम ने अपना सिर नीचे कर लिया।


दिया: फिर क्रिकेट खेलकर आ गए?


राम: हाँ।


दिया: तुम किसी से ज़्यादा बात क्यों नहीं करते हो? कोई प्रॉब्लम है क्या?


राम: नहीं, कोई प्रॉब्लम नहीं है।


दिया: तो फिर बात किया करो सबसे। उस वक़्त भी तुम चुप थे, और वो तीनों तुम्हारे बारे में क्या-क्या बोल रहे थे।


दिया: राम, कुछ तो बोलो।


राम: क्या? मेरा मतलब, क्या बोलूँ?


दिया: मैं शुरू से तुम्हें ऐसे ही देख रही हूँ। कोई भी कुछ भी बोल देता है, पर तुम कुछ नहीं बोलते हो।


घर आकर राम दिया की बातों में खो गया। उसे बहुत बुरा लग रहा था। वह अंदर ही अंदर खुद को कोसता रहा और रात भर सो नहीं पाया। अगले दिन राम सुबह-सुबह घर से दूर एक शांत पार्क में बैठने चला गया। राम रात भर नहीं सोया था, तो पार्क में उसे नींद आ गई और वह घास पर सो गया। नींद पूरी होने के बाद उसने पार्क में एक साधु को देखा। वे ध्यान कर रहे थे। राम को लगा कि यह साधु उसकी समस्या दूर कर सकते हैं। राम उनके पास चला गया, पर बोलने की हिम्मत नहीं हुई। राम उनके पास चुपचाप जाकर बैठ गया और उन्हें देखता रहा।


साधु (ध्यान करने के बाद): क्या हुआ, बच्चे? कोई समस्या है तो बताओ।


राम: हाँ, है।


साधु: मुझे बताओ, क्या समस्या है? शायद मैं तुम्हारी मदद कर दूँ।


राम: मैं अपनी समस्या को समझा नहीं सकता, क्योंकि मुझे खुद समझ नहीं आता कि मेरी समस्या क्या है। शायद यह कि मैं लोगों से बात-चीत नहीं कर पाता।


साधु: इसका कारण भी तुम्हारे पास ही है।


राम: हाँ, साधु महाराज… मुझे डर लगता है। मौके तो कई मिले हैं, पर डर मुझे पीछे खींच लेता है।


राम: क्या आपके पास डर से जीतने का कोई उपाय है?


साधु: हाँ, है। लेकिन मैं तभी बताऊँगा जब तुम अपनी पाँच बुरी आदतें मुझे बताओगे।


राम सोच में पड़ गया — ऐसे किसी अनजान व्यक्ति को पाँच बुरी आदतें कैसे बता दूँ?


साधु: एक बात याद रखो, राम।


राम: आपको मेरा नाम कैसे पता चला, साधु महाराज?


साधु: मेरी बात ध्यान से सुनो। जो बातें हम आपनो को बताते हैं, वे जीवन भर हमारे आसपास रहती हैं। लेकिन किसी अनजान इंसान से की हुई बात कभी दोबारा तुम्हें सताएगी नहीं।


राम: प्रभु, आपको मेरे मन की बात कैसे पता चली, और मेरा नाम भी?


साधु: राम, पहले मेरे सवाल का जवाब दो — क्या तुम अपनी 5 बुरी आदतें मुझे बता सकते हो?


राम वहाँ से उठकर घर चला गया। पता नहीं, वह साधु है या फिर कोई जादूगर।

घर जाकर वह गहरी सोच में पड़ गया — साधु को मेरा नाम कैसे पता चला? उसने मेरे विचार कैसे पढ़ लिए?

अगर यह कला मुझे मिल जाए, तो मैं सब कुछ कर लूँगा… दिया के विचार भी पढ़ लूँगा।

पर कैसे? क्या साधु को अपनी पाँच बुरी आदतें बता दूँ?


अगले दिन 


साधु: आ गए तुम? क्या आज अपनी बुरी आदतें मुझे बताओगे?


राम: हाँ, साधु महाराज… पर किसी को बताना मत।


साधु: तो फिर बताओ।


राम: मैं मोबाइल बहुत चलाता हूँ, मुझे सिगरेट की लत लग गई है।


साधु: और बताओ, यह तो दो हैं।


राम (कुछ देर चुप रहने के बाद): मैं बहाने बहुत बनाता हूँ किसी भी काम को करने के लिए, क्योंकि मैं असली हूँ। और मैं बहुत सोचता हूँ। दिमाग में एक अलग दुनिया बना लेता हूँ। मुझे जरूरत से ज्यादा सोचने की लत लग गई है।


साधु: अभी एक और बची है।


राम: हाँ, मैं हर दिन कामवासना में खोया रहता हूँ। मैं हर दिन कामुक कार्य करता हूँ। मैंने इसे कई बार रोकने की कोशिश की, पर आज तक नियंत्रण नहीं पा सका।


साधु: तुम 21 वर्ष के हो, पर अधिक कामवासना के कारण थके हुए लगते हो।


राम: पहले आपको मेरा नाम, फिर मेरा विचार, और अब मेरी उम्र — ये सब आपको कैसे पता चल रहा है?


साधु: राम, इसका जवाब तुम्हें सही समय पर मिल जाएगा। हम पहले तुम्हारी समस्या हल करते हैं।


राम: हाँ, साधु महाराज, मैं खुद से परेशान हो गया हूँ। आप जल्द से जल्द इसका समाधान करें।


साधु: देखो राम, मैं सिर्फ तुम्हें रास्ता बताऊँगा, चलना तुम्हें है।


राम: साधु महाराज, आप जो भी रास्ता बताएं, मैं उस पर चलने के लिए तैयार हूँ।


साधु: सबसे पहले तुम्हारे लिए कोई ऐसा काम ढूँढो, जिसमें बातचीत करने के पैसे मिले, जिससे तुम्हें बात करने का अभ्यास हो सके।


राम: मेरी बहन कॉल सेंटर में नौकरी करती है। वह दिन भर लोगों से बात करती है। मैं वहाँ कर लूँगा।


साधु: तो जाओ, वहाँ काम करो। मेरे पास 2 महीने बाद आना। और एक बात याद रखो — यह काम कम से कम 6 महीने तक करना। इससे तुम बात करने में माहिर हो जाओगे।


राम घर जाकर बोलता है:


राम: मम्मी, मैं कॉल सेंटर में नौकरी करूँगा। दीदी से बोल देना, मेरी बात करवा दें।


मम्मी: बेटा, पहले BA तो पूरा कर ले।


राम: नहीं, मम्मी, वैसे भी मैं बस पेपर देने जाता हूँ।


नेहा (राम की बड़ी बहन): कर लेना, मैं कल बात करवा दूँगी।


अगले दिन 


इंटरव्यूवर: तो राम, अपने बारे में बताओ और आप यहाँ नौकरी क्यों करना चाहते हो?


इंटरव्यूवर के सामने राम के मुँह से कुछ नहीं निकला, लेकिन उसकी बहन की वजह से राम को 6000 रुपये सैलरी के साथ नौकरी दे दी गई।


पहले दो महीने राम का प्रदर्शन काफी खराब था, पर अब वह लोगों से बात करने में काफी अच्छा हो गया है।


दो महीने बाद राम साधु से मिलने गया।


राम: साधु महाराज, आपके चरणों में मेरा प्रणाम।


साधु: आओ, राम, आओ।


राम: महाराज, अब बताइए मुझे क्या करना है।


साधु: सबसे पहले तुम मुझे अपनी दिनचर्या बताओ।


राम: मैं सुबह 8 बजे उठता हूँ, तैयार होता हूँ, खाना खाता हूँ और 10 बजे ऑफिस चले जाता हूँ। 2:30 बजे लंच होता है, 7 बजे छुट्टी होती है। खाना खाता हूँ, कुछ देर दोस्तों के पास जाता हूँ, मोबाइल चलाता हूँ, फिर नींद आती है और सो जाता हूँ।


साधु: क्या तुम्हें किसी को पसंद है? कोई है?


राम: हाँ, एक है। वह मेरे घर के सामने रहती है, उसका नाम दिया है।


साधु: क्या तुमने अपनी दिल की बात उससे कहीं है?


राम: नहीं, साधु महाराज, आज तक हिम्मत नहीं हुई।


साधु: तो अपनी दिल की बात उसे बताओ।


राम: अगर उसने मना कर दिया तो?


साधु: तो तुम आजाद हो जाओगे, उसके प्रति प्यार से।


राम: ठीक है, मैं उसे दिल की बात कहूँगा।


अगले दिन 


राम: दिया।


दिया: हाँ, बोलो। कोई काम है मुझसे?


राम: मुझे तुमसे कुछ कहना था।


दिया: हाँ, बोलो।


राम: यहाँ नहीं, अकेले में।


दिया: हाँ, अब बोलो। क्या कहना है?


राम: मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ, मतलब शादी करना चाहता हूँ।


दिया: मैं तुम्हारी बात समझ सकती हूँ, पर तुम्हें अपने भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।


राम: दिया, तुम ये बताओ, क्या तुम मुझे पसंद करती हो?


दिया: नहीं, अभी तो नहीं।


अगले दिन साधु के साथ:


राम: मैंने बोल दिया, वह मुझे पसंद नहीं करती है, साधु महाराज।


साधु: भला क्यों करेगी? तुम्हें पसंद? तुम में क्या है? कुछ भी नहीं।


राम: सच कहा, महाराज। अब मुझे आगे क्या करना है?


साधु: ब्रह्मचर्य का पालन करोगे।


राम: पर कैसे, महाराज? मुझे ब्रह्मचर्य पालन का कोई ज्ञान नहीं है।


साधु : जैसा मैं कहूँ, वैसा करना। पहले हम तुम्हारे शरीर और आदतों को ब्रह्मचर्य पालन के लायक बनाएँगे। कल से तुम्हें सुबह 5 बजे उठना है, रात को जल्दी सोना है और मोबाइल कम चलाना है। सुबह उठ कर 10 से 15 मिनट तक ध्यान करना है साथ में 30 मिनट तक व्यायाम ज़रूर जरूर करना | 


राम : पर सुबह जल्दी उठने का मन नहीं करता।


साधु : मन की हर बात का नियंत्रण तुम्हारे पास रखो। हर बार अपने मन की सुनना ठीक नहीं है।


राम : महाराज, उसके बाद क्या करना है?


साधु : पहले इस काम को 3 महीने तक करो, उसके बाद मेरे पास आना।


राम के लिए पहले कुछ दिन मुश्किल थे, सुबह जल्दी उठना कठिन लगता था, पर वह इसे कर लेता है। अब घर वाले राम के इस काम से खुश हैं और वह धीरे-धीरे बदल रहा है।


तीन महीने बाद, महाराज के पास:


राम : महाराज, आपने मेरा जीवन सुधार दिया है। मैं बहुत खुश हूँ।


साधु : बेटा राम, अभी तो शुरुआत है। अब तुम्हें सिगरेट पीना बंद करना होगा।


राम : पर महाराज, मैं रोज सिर्फ एक सिगरेट लेता हूँ और यह आम बात है।


साधु : तुम्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना है, तो इस लत को छोड़ना होगा। आज से सिगरेट नहीं लोगे। तीन महीने बाद मुझसे मिलना।


राम ने जैसे-तैसे खुद से लड़कर सिगरेट छोड़ दी। इन छह महीनों में उसने खुद को काफी बदल लिया है। अब वह समय से पहले उठता है, रोज ध्यान और व्यायाम करता है, और उसकी नौकरी में भी उसका प्रदर्शन बेहतर हो गया है। उसकी कामुक गतिविधियाँ भी कम हो गई हैं—पहले रोज करता था, अब हफ्ते में सिर्फ एक बार।


अगले दिन साधु के साथ:


साधु: राम, मुझे लगता है अब तुम ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए तैयार हो।


राम: हाँ, साधु महाराज, मैं पूरी तरह तैयार हूँ।


साधु: आज से तुम्हें रोज वर्तमान में जीना होगा। ना अतीत की गलतियों पर पछतावा करोगे, ना भविष्य की चिंता करोगे। जो भी काम कर रहे हो, उस पर ध्यान केंद्रित करो। आज से अपने और किसी दूसरे के बारे में गलत मत सोचना। जो कुछ भी तुम्हारे पास है, उसके लिए रोज सोने से पहले धन्यवाद बोलो। यह सब अपने मन में बोलना। 


साधु: और यह लो, ब्रह्मचर्य पालन की किताब। इसे हर रोज पढ़ना।


राम: पर महाराज, इसमें तो सिर्फ 20 पन्ने हैं। मैं यह पूरी किताब तो 4 दिन में पढ़ लूँगा।


साधु: इस किताब को 2 महीने तक पढ़ो, जितनी बार हो सके उतनी बार पढ़ो।


राम: किताब को बार-बार पढ़ने का क्या फायदा?


साधु: जितनी बार तुम इस किताब को पढ़ोगे, उतना अच्छे से समझ पाओगे और दूसरों को समझा पाओगे। हम जिस कार्य को करते हैं, उसे दुनिया को समझाना आना चाहिए। राम, अब दो महीने बाद मेरे पास आना।



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