ब्रह्मचर्य पालन और सोशल मीडिया: डोपामिन कंट्रोल का असली तरीका
अगर आप भी दिन के कई घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं तो सावधान हो जाएँ। फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, ट्विटर — आज ये सब किसी के लिए वरदान हैं तो किसी के लिए बुरी लत। यहाँ कोई अच्छी कमाई करता है तो कोई अपना समय बर्बाद करता है। यहाँ ज़्यादातर लोग अपना समय बर्बाद करते हैं, पैसे कमाने वाले बहुत कम होते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का सीमित समय में उपयोग करना ठीक है, लेकिन खाना खाते समय या सड़क पर चलते समय इनका इस्तेमाल करना सही नहीं है। आज सोशल मीडिया एक ऐसी लत बन गई है जिससे कोई नहीं बच पाया। छोटे, बड़े और बुजुर्ग सभी इसका इस्तेमाल करते हैं।
सोशल मीडिया एक बुरी लत है। यह बात सभी जानते हैं कि सोशल मीडिया आज हमारे लिए बुरी लत से कम नहीं है। आज सबसे पहले उठते ही हम अपना फोन चेक करते हैं कि कहीं कोई मैसेज तो नहीं आया, कितने लाइक आए, कितने व्यू आए, या फिर स्क्रॉलिंग करना। सुबह का गोल्ड समय हम इन प्लेटफॉर्म्स पर लगा देते हैं। अगर आप ये काम नहीं करते हैं तो बहुत अच्छी बात है। पर आज कोई जीवन जीने से ज्यादा स्टोरी पर दिखा रहा है। अपनी हर पर्सनल फीलिंग स्टोरी पोस्ट के माध्यम से लोगों को परोस रहा है।
आज हर छोटे से छोटा त्योहार सोशल मीडिया पर मनाया जाता है। अगर आज आपका जन्मदिन है, तो बधाई हो — आपका पूरा दिन स्टोरी के रिप्लाई देने और टैग करके "थैंक्यू" कहने में ही जाएगा। यह बात कड़वी है, पर आज की समाज के लिए शर्मनाक है।
दिन में कई बार इन प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ लोगों की अटेंशन के लिए जाना, अपने व्यू चेक करना, लाइक चेक करना — अगर यह बुरी लत नहीं है तो और क्या है?
दूसरों की पोस्ट और स्टोरी देखकर अपने बारे में बुरा सोचना भी गलत है। सिर्फ सोशल मीडिया पर किसी को फॉलो करने से हम उनके करीब नहीं होते, बल्कि उनकी असलियत से बहुत दूर होते हैं। सोशल मीडिया पर वही दिखता है जो वे दिखाना चाहते हैं।
हाँ, मैं मानता हूँ कि सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपने रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी को फॉलो करते हैं। पर फिर भी आप उनकी असल दुनिया से दूर हैं। वे क्या सोचते हैं, क्या करना चाहते हैं — यह आपको नहीं पता, और भी बहुत कुछ।
तो सोशल मीडिया पर किसी को फॉलो करने से आप उनके करीब नहीं होते। मैं यह नहीं कह रहा कि सोशल मीडिया पूरी तरह से गलत है। यह गलत तब होता है जब आप दिन का ज्यादा समय इस पर बिताएँ, इसके माध्यम से कुछ गलत करें — जैसे किसी को फालतू मैसेज करना, गलत कमेंट करना, गलत पोस्ट करना या गलत चीज़ें देखना।
एक बात ध्यान रखें — सिर्फ लोगों की अटेंशन पाना हमारे जीवन का उद्देश्य नहीं है। हमें वाकई में कुछ अच्छा करना है, जो समाज को बदले और हमें भी बदले। बदलाव हमेशा पहले खुद से शुरू करो, फिर समाज के बारे में सोचो।
अगर आप ब्रह्मचर्य पालन कर रहे हैं और सोशल मीडिया का अधिक उपयोग कर रहे हैं, तो यह ठीक नहीं है। अधिक सोशल मीडिया का उपयोग करना मतलब दिमाग को अधिक डोपामिन देना है। जब भी हमें कुछ अच्छा लगता है, तो दिमाग डोपामिन छोड़ता है — जैसे किसी ने तारीफ़ कर दी, लड़की का मैसेज आ गया, लाइक मिल गया या नया कंटेंट दिख गया। और ब्रह्मचर्य पालन में दिमाग को डोपामिन पर नियंत्रण रखना पड़ता है।
इससे आपकी सोशल मीडिया की लत भी कम होगी, दिमाग की उत्पादकता भी बढ़ेगी और समय का सही उपयोग भी होगा। ब्रह्मचर्य का आधा बल डोपामिन कंट्रोल में ही है।
ब्रह्मचर्य पालन के हज़ारों आर्टिकल आपको इंटरनेट पर मिल जाएंगे, पर असली समस्या पर कोई बात नहीं करता। आज की युवा पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया एक वरदान है, इसलिए हम इसे पूरी तरह गलत भी नहीं कह सकते। आज हम बात करेंगे कि ब्रह्मचर्य पालन के साथ सोशल मीडिया का उपयोग कैसे करना है।
हम रोज़ एक घंटा सोशल मीडिया चला सकते हैं। चाहे आप YouTube चलाएं या Instagram, दिन में 1 घंटे से ज़्यादा नहीं। नोटिफ़िकेशन्स को बंद कर दें — Instagram, Facebook, YouTube, यहाँ तक कि Browser के भी। सेटिंग में जाकर टाइम लिमिट लगाएं। उन सभी अकाउंट्स को अनफ़ॉलो कर दें जो आपको अनचाहा कंटेंट देखने के लिए उकसाते हों। आप मोबाइल में अलार्म भी सेट कर सकते हैं।
पहले हमें सिर्फ 1 घंटा चलाने का अभ्यास करना है। फिर कुछ महीने बाद इसे आधा घंटा करें और फिर 2 दिन में एक बार। ऐसे धीरे-धीरे सोशल मीडिया की लत कम होगी।