ब्रह्मचर्य से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति कैसे बढ़ती है | Brahmacharya Benefits in Hindi
हमने अभी तक ब्रह्मचर्य पर कई लेख लेखे, और ब्रह्मचर्य को काफी अच्छे से समझा है | हमारा उद्देश्य है की हर युवा को जीवन में एक बार ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए | ब्रह्मचर्य पालन करने से मानसिक स्वास्थ्य ठीक होता है और भी कई फायदे है ब्रह्मचर्य के | आज हम जानेंगे की ब्रह्मचर्य से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति कैसे बढ़ती है | अगर आप भी ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे है, या फिर करना चाहते है तो इंटरनेट या किताब से ब्रह्मचर्य का के लेख जरूर पढ़े है | इससे आपको ब्रह्मचर्य का पालन करने में काफी मदत मिलेगी है |
ब्रह्मचर्य को हम सफलता का रास्ता भी कहे सकते है, ये वह रास्ता है जो हमे जीवन जीना सिखाता है | आज के समय में बहुत काम लोग ब्रह्मचर्य का पालन कर पाते है कोई सात दिन तो कोई तीन दिन | जैसे की हमने कहा था इस लेख में हम "ब्रह्मचर्य से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति कैसे बढ़ती है" पर बात करेंगे है | पर पहले हम बात करते है की हमारी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति कैसे कम होती है अगर हम इसको समझ गए तो और भी अच्छा है |
मानसिक शक्ति कैसे कम होती है ?
आध्यात्मिक शक्ति कैसे कम होती है ?
जब हम काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार में डूब जाते है, तो हमारी “अंतरात्मा” की आवाज़ धीमी पड़ जाती है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ये पाँच हमारे शत्रु से भी बुरे है | जब हमारा मन भगवान, ध्यान, जप या प्रार्थना से हट जाता है, तो आध्यात्मिक संपर्क टूटने लगता है। फिर झूठ, छल, कपट, वासना, और नकारात्मक सोच हमारे काबू में नहीं रहती है, और ये आत्मा पर “काले धब्बे” की तरह असर करती हैं। इसी कारण हम भीतर से असंतुलन और बेचैनी महसुसु करते है | “मैं ही सब कुछ हूँ”, "मेरे बिना कुछ नहीं हो सकता" वाली भावना आत्मा की विनम्रता को नष्ट कर देती है। और सबसे खास बात हम जिस वातावरण में रहते है उसके कारण भी हमारी आध्यात्मिक शक्ति कम होती है | लेकिन वातावरण को दोस देना ठीक नहीं है |
ब्रह्मचर्य से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति कैसे बढ़ती है ?
जब हमारी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति कम होने लगती है तो ब्रह्मचर्य पालन एक बहुत अच्छा विकल्प है | ब्रह्मचर्य मतलब “संभोग से दूर रहना” नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा संरक्षण की एक गहरी प्रक्रिया है। एक ब्रह्मचर्य पालन ही है जो हमे जीवन जीना सिखाता है | जब हम ब्रह्मचर्य का पालन शुरू करते है तो वह उस ऊर्जा को व्यर्थ नहीं बहाता जो हमारे मस्तिष्क के पोषण में जाती है। जब हम आपने वीर्य को शरीर में रोकते है तो शरीर इसे ऊपर की ओर खींचकर मस्तिष्क में ओज में बदल देता है। फिर यही ओज हमे मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और तेज बुद्धि देती है | जब हम कामवासना को नियंत्रित करते हो, तो हमारे मन की अनावश्यक हलचल शांत हो जाती है। जिससे हमारा ध्यान, अध्ययन, और निर्णय शक्ति कई गुना अधिक बढ़ जाती है। जो ऊर्जा पहले कामवासना अन्य भोग में जाती थी, वही अब सृजन, अध्ययन, और साधना में लगती है। ब्रह्मचर्य पालन से हमारे शरीर के भीतर की प्राण ऊर्जा स्थिर होती है। यही ऊर्जा धीरे-धीरे मूलाधार से सहस्रार तक ऊपर उठती है, जिसे “कुंडलिनी जागरण” कहते हैं। यह हमको आध्यात्मिक अनुभवों के योग्य बनाती है। जब इंद्रियों का संयम होता है, तो मन में शुद्धता आती है। शुद्ध चित्त ही ध्यान, भक्ति और समाधि का पात्र होता है। ब्रह्मचर्य से हमारे भीतर की चेतना निर्मल होती है। जब हमारा मन शांत और निर्मल होता है, तब भीतर का “साक्षी भाव” जागता है यह वही आत्मा है और वहीं से हमारा ईश्वर-साक्षात्कार का आरंभ होता है।
अगर आज के समय में कोई व्यक्ति सच्चे मन से ब्रह्मचर्य का पालन करे तो उसके चेहरे पर तेज, वाणी में प्रभाव, मन में स्थिरता, गहरी एकाग्रता, आत्मविश्वास और निर्भयता, आध्यात्मिक आनंद देखने को मिलेगा | ये सब पढने में इनता अच्छा लग रहा तो सोचो तुममे ये सब हो तो कितना अच्छा लगेगा है |